National Teacher Award 2026: गणित का डर दूर कर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे भिवानी के शिक्षक अनिल कौशिक, मिला राष्ट्रीय सम्मान

हरियाणा के इकलौते शिक्षक अनिल कौशिक को मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान। गणित को बनाया आसान, वर्चुअल लैब की शुरुआत।
 
Haryana State Teacher Award

गणित का डर मिटाया... तो राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा सम्मान

राष्ट्रपति से शिक्षक सम्मान मिलने विद्या नगर स्थित उनके परिजनों में खुशी का माहौल

चॉक-बोर्ड से शुरू हुआ सफर वर्चुअल लैब तक पहुंचा, अब देशभर के बच्चों को आसान लग रहा गणित

हरियाणा के इकलौते राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित शिक्षक अनिल कौशिक को राज्य शिक्षक पुरस्कार भी | 130 से ज्यादा मैथ्स पजल और 300+ वीडियो के जरिए बदल रहे पढ़ाई का अंदाज

भिवानी । जिस विषय का नाम सुनकर कभी बच्चे सवालों से बचने लगते थे, उसी गणित को रोचक बनाने की जिद ने एक शिक्षक को राष्ट्रीय पहचान दिला दी। गणित को मॉडल, गतिविधियों, पजल और डिजिटल तकनीक के जरिए आसान बनाने वाले अनिल कौशिक को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया है। हरियाणा से इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पाने वाले वे एकमात्र शिक्षक हैं।

उनकी उपलब्धियों को प्रदेश सरकार ने भी सम्मान दिया है। अनिल कौशिक को हरियाणा राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित कर राज्य स्तर पर भी सम्मानित किया गया। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सेवानिवृत सहायक सचिव चांद राम शर्मा, विद्या नगर निवासी ने बताया कि

अनिल कौशिक वर्ष 2011 में गणित अध्यापक के रूप में शिक्षा विभाग से जुड़े।फिलहाल वो गांव सांघी में अपनी सेवा दे रहे है कक्षा में पढ़ाते हुए उन्हें महसूस हुआ कि बहुत से बच्चे गणित को कठिन विषय मानकर उससे दूरी बना लेते हैं।

बच्चों के इसी डर को खत्म करने के लिए उन्होंने वर्ष 2017 में ऑफलाइन मैथमेटिक्स लैब शुरू की।

यहां गणित सिर्फ किताब के पन्नों पर नहीं था। भारतीय गणितज्ञों की जीवनी, चार्ट, मॉडल, फार्मूले और गतिविधियों के जरिए बच्चों को गणित समझाया गया।

इस प्रयोग को पहचान मिली और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने भी उनके नवाचार को सम्मानित किया।

कोरोना काल में स्कूल बंद हुए तो अनिल कौशिक ने अपने प्रयोग को डिजिटल रूप देने का फैसला किया। वर्ष 2024 में वर्चुअल मैथमेटिक्स लैब तैयार की। अब कक्षा में मौजूद मॉडल और सामग्री मोबाइल व इंटरनेट के माध्यम से बच्चों तक पहुंचने लगी।

अनिल कौशिक ने डिजिटल शिक्षा को केवल लैब तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने खुद 300 से अधिक शैक्षणिक वीडियो बनाए और उन्हें यूट्यूब समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया।
उनका प्रयास है कि बच्चे गणित को रटें नहीं, बल्कि समझें, सवाल पूछें और प्रयोग करके सीखें।

सेवानिवृत सहायक सचिव चांद राम शर्मा ने बताया कि अनिल कौशिक की सफलता के पीछे उनके परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अनिल के पिता लक्ष्मी नारायण भी शिक्षक रहे हैं।
पिता से उन्होंने धैर्य और शिक्षण के प्रति समर्पण सीखा, जबकि मां कृष्णा देवी ने असफलताओं से घबराने के बजाय लगातार प्रयास करते रहने की सीख दी।

दादा श्री रामकिशन शर्मा ,पिता लक्ष्मी नारायण शर्मा शिक्षक रहे है और चाचा

चाँद राम शर्मा से उन्हें काम में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा मिली

 उन्होंने साबित किया कि अगर शिक्षक बच्चों की समस्या को समझकर पढ़ाने का तरीका बदल दे तो कठिन से कठिन विषय भी आसान हो सकता है।

एक छोटी-सी ऑफलाइन मैथ्स लैब से शुरू हुआ सफर आज वर्चुअल लैब के जरिए देशभर के विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है।

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान ने अनिल को पहचान दी, लेकिन बच्चों के चेहरों पर गणित की समझ वाली मुस्कान ही उनकी असली उपलब्धि है।