डिलीवरी की रफ्तार नहीं, अब सुरक्षा होगी प्राथमिकता 10 मिनट डिलीवरी नियम खत्म 

 
डिलीवरी की रफ्तार नहीं, अब सुरक्षा होगी प्राथमिकता 10 मिनट डिलीवरी नियम खत्म 

देशभर में गिग वर्कर्स की एकजुट आवाज आखिरकार असर दिखा गई। सरकार के हस्तक्षेप के बाद ऑनलाइन ऑर्डर्स पर लागू 10 मिनट डिलीवरी की समय-सीमा को हटा लिया गया है। यह फैसला उन हजारों डिलीवरी बॉयज के लिए राहत बनकर आया है, जो अब तक समय के दबाव में अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर थे।

तेजी का दबाव, बढ़ता खतरा :

10 मिनट की डिलीवरी शर्त ने डिलीवरी बॉयज पर असहनीय मानसिक और शारीरिक दबाव बना दिया था। हर ऑर्डर एक रेस बन चुका था, जहां जरा सी देरी पर पेनल्टी, कस्टमर की नाराज़गी और कंपनी की सख्ती झेलनी पड़ती थी। इस जल्दबाजी ने सड़क हादसों की आशंका को कई गुना बढ़ा दिया था।

सर्दी, कोहरा और जानलेवा हालात :

खासतौर पर सर्दियों में ठंड और घना कोहरा डिलीवरी बॉयज के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया था। सीमित समय में ऑर्डर पहुंचाने की मजबूरी के चलते कई बार उन्हें सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी करनी पड़ती थी। यही लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम का दबाव कई हादसों और जान गंवाने की वजह बना।

हड़ताल की आवाज, सरकार का संज्ञान :

देशभर के गिग वर्कर्स की हड़ताल ने सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींचा। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया और 10 मिनट डिलीवरी की बाध्यता को समाप्त कर दिया। यह फैसला सिर्फ नियम में बदलाव नहीं, बल्कि मेहनतकश डिलीवरी बॉयज के जीवन की सुरक्षा की दिशा में अहम पहल है।

करनाल के डिलीवरी बॉयज ने जताया आभार :

सरकारी फैसले के बाद करनाल के डिलीवरी बॉयज ने खुलकर राहत और संतोष जाहिर किया। उनका कहना है कि अब उन्हें हर ऑर्डर के साथ डर लेकर नहीं निकलना पड़ेगा। समय सीमा हटने से न केवल काम का दबाव कम हुआ है, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की भावना भी लौटी है।

डिलीवरी बॉयज की पीड़ा, अब मिली सुनवाई :

डिलीवरी बॉयज ने बताया कि पहले कई बार 10 मिनट की देरी पर कस्टमर ऑर्डर लेने से मना कर देता था और उसका खामियाजा पेनल्टी के रूप में उन्हें भुगतना पड़ता था। अब सरकार के फैसले से उन्हें यह भरोसा मिला है कि उनकी जान, किसी डिलीवरी टाइम से कहीं ज्यादा कीमती है।