TriCity Vegetable Market Update: बारिश और सप्लाई की कमी से रो रहा प्याज, जानें क्यों पूरा साल महंगे रहेंगे दाम
पंचकूला: चीनी के बाद प्याज की कीमत भी लगातार बढ़ रही है. जिसके चलते रसोई का बजट बिगड़ गया है. गृहणियों से लेकर हर कोई परेशान है. लोग सरकार से बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने और प्याज की जमाखोरी को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने करने की गुहार लगा रहे हैं. लोगों का मानना है कि कीमतें बढ़ने का एक कारण जमाखोरी भी हो सकता है. इस मामले पर ट्राईसिटी (चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली) की सबसे बड़ी सब्जी एवं फल मंडी में आढ़ती और आम लोगों से बातचीत की.
बारिश से राजस्थान की फसल खराब: सब्जी मंडी के आढ़ती राहुल खन्ना ने बताया कि "मौजूदा समय में चंडीगढ़ सेक्टर 26 की सब्जी मंडी में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश का प्याज पहुंच रहा है. आगामी दिनों में राजस्थान से प्याज पहुंचना है, लेकिन अधिक बारिश होने से राजस्थान में प्याज की फसल खराब हो गई है. इसी कारण प्याज के भाव में तेज बनी रहने की संभावना है. इसके अलावा सरकारी गोदामों में देखभाल सही तरीके से नहीं होने के कारण भी प्याज के दाम तेजी पकड़ रहे हैं, क्योंकि प्याज खराब भी हो रहा है. बारिश से फसल खराब होने और सरकारी गोदामों में देखभाल सही नहीं होने से उन्होंने पूरा साल प्याज के दाम में तेजी बनी रहने की संभावना जताई है."
डिमांड ज्यादा, लेकिन सप्लाई कम: आढ़ती राहुल खन्ना ने बताया कि "प्याज की मांग ने अधिक जोर पड़ा हुआ है, लेकिन सप्लाई उस अनुसार नहीं हो रही है, जिससे प्याज की कीमतों ने तेजी पकड़ी हुई है. देशभर में प्याज की मांग अधिक है. लेकिन सप्लाई कम होने का सीधा असर प्याज की कीमतों पर पड़ता है."
4500 रुपये प्रति क्विंटल कीमत: राहुल खन्ना ने बताया कि "आढ़ती को प्याज की मौजूदा कीमत प्रति क्विंटल करीब 4500 रुपये पड़ रही है. सोमवार को मंडी बंद रहने के कारण मंगलवार को यही कीमत प्रति क्विंटल करीब 4500 से 4800 रुपये तक जाने का अनुमान है. भाव का ये अंदाजा महाराष्ट्र व अन्य प्रदेशों की मंडियों में खुले रेट के अनुसार लगाया जाता है. ऐसे ही रोजाना भाव बदलता है और जब कभी किसी आढ़ती/कारोबारी के पास दी गाड़ी अधिक पहुंच जाए, तो भाव में एक-दो रुपये का अंतर भी आ जाता है. इसके लिए सामान की मात्रा और क्वालिटी निर्भर करती है."
हरियाणा-पंजाब व हिमाचल में सप्लाई: राहुल खन्ना ने बताया कि "चंडीगढ़ की सब्जी मंडी में दिसंबर में गुजरात का प्याज भी आता है, लेकिन उस दौरान तक प्याज का भाव अधिक नीचे आने की संभावना नहीं है. चंडीगढ़ की सब्जी मंडी से प्याज की सप्लाई हरियाणा समेत पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी होती है. लेकिन प्याज का भाव लगभग पूरा साल ऐसे ही आंसू निकालने वाला बना रहेगा, क्योंकि डिमांड अधिक रहने और सप्लाई कम होने से भाव तेजी पकड़ता रहेगा."
प्याज की बढ़ी कीमत से लोगों में रोष: चंडीगढ़ सेक्टर 26 सब्जी मंडी में खरीदारी करने पहुंचे मनीमाजरा निवासी बलबीर सिंह रावत ने कहा कि "हर साल बारिश के दिनों में प्याज और अन्य सब्जियों के भाव में तेजी देखी जाती है, लेकिन इस साल तेल की कीमतें अधिक बढ़ने से ट्रांसपोर्ट पर बड़ा असर पड़ा है. प्याज और अन्य खाद्य पदार्थों के भाव बढ़ने का एक कारण तेल महंगा होना भी हो सकता है. चंडीगढ़ में बाहरी प्रदेशों से प्याज पहुंचता है और तेल की कीमत अधिक होने से सब्जियों के भाव पर असर पड़ता है."
स्थानीय बाजार में 70/80 रुपए किलो प्याज: जीरकपुर से चंडीगढ़ की सब्जी मंडी में प्याज खरीदने पहुंचे अमनदीप सिंह ने कहा कि "पहले मैं जीरकपुर से ही खरीदारी कर लिया करता था. मौजूदा समय में स्थानीय बाजार में प्याज का भाव प्रति किलो 70/80 रुपये है और वो भी अच्छी क्वालिटी का नहीं है. सरकार को प्याज की जमाखोरी पर भी ध्यान देना चाहिए. अमनदीप सिंह ने कहा कि "असल में ब्याज के भाव ने रुला दिया है, क्योंकि हमें केवल प्याज खरीदने के लिए ही जीरकपुर से चंडीगढ़ की सब्जी मंडी आना पड़ता है."
प्याज और चीनी भाव पर सवार: स्थानीय निवासी अमन कालिया ने कहा कि "प्याज और चीनी के भाव रॉकेट पर सवार हैं, क्योंकि कीमत में लगातार बढ़ोतरी बनी हुई है. सोमवार को एक क्विंटल प्याज 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिला, कुछ समय पहले ये 30-40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से था, यानिकी भाव अब दोगुना हो गया है. मैं चंडीगढ़ सेक्टर-7 से दुकान के लिए प्याज लेने पहुंचा हूं."
मासिक बजट संतुलित नहीं: स्थानीय लोगों ने बताया कि मौजूदा समय में प्याज, चीनी व तेल समेत अन्य खाद्य पदार्थों की कीमत पहले के मुकाबले अधिक बढ़ने और इनके लगातार तेजी पकड़ने से लोग अपने मासिक बजट को संतुलित नहीं रख पा रहे हैं. सब्जियों के भाव में स्थिरता नहीं बनी होने से लोगों की परेशानी बरकरार है. सबसे अधिक चिंता रोजाना की जरुरत, प्याज के भाव नियंत्रित नहीं होने से है.