Pandit Nekiram Sharma 139th Jayanti: अखिल भारतीय किसान सभा ने दी महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि, संघर्षों को किया याद

भिवानी में महान स्वतंत्रता सेनानी और किसान नेता पंडित नेकीराम शर्मा की 139वीं जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि।
 
Bhiwani news today

पंडित नेकीराम शर्मा की 139वीं जयंती पर किसान सभा ने दी श्रद्धांजलि

आजादी, किसान हित और सामाजिक न्याय के उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प

भिवानी  7 सितम्बर : अखिल भारतीय किसान सभा भिवानी ने महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं प्रमुख किसान नेता पंडित नेकीराम शर्मा की 139वीं जयंती पर उनकी आदमकद प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उनके जीवन, संघर्ष और विचारों को याद करते हुए उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान रामफल देशवाल, उपप्रधान कामरेड ओमप्रकाश, युवा कल्याण संगठन के कमल प्रधान, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकार संगठन के महेंद्र यादव तथा दलित अधिकार मंच के जिला संयोजक सुखदेव पालवास ने संयुक्त रूप से कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा का पूरा जीवन देश की आजादी, किसान-मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक बराबरी के लिए संघर्ष करते हुए बीता।

उन्होंने कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा ने उत्तर भारत में होम रूल आंदोलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और एनी बेसेंट तथा बाल गंगाधर तिलक के साथ आंदोलन में सक्रिय रहते हुए गिरफ्तारी दी। उन्होंने 1920 के असहयोग आंदोलन, 1930 के नमक सत्याग्रह, व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया। वे नौ बार जेल गए और करीब 2200 दिन अंग्रेजों की जेलों में रहे। कठोर कारावास के दौरान अंग्रेजों ने उनसे चक्की तक चलवाई।

वक्ताओं ने कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा एक महान स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ प्रखर समाज सुधारक भी थे। उन्होंने बाल विवाह, पर्दा प्रथा, जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ लगातार अभियान चलाया। वे विधवा विवाह के समर्थक थे तथा दहेज प्रथा और शादियों में अनावश्यक खर्च व बड़ी बरातों के खिलाफ थे। उन्होंने महिलाओं को सामाजिक रूढ़ियों से मुक्त कराने के लिए भी महत्वपूर्ण संघर्ष किया।

उन्होंने कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा ने किसानों को संगठित कर उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूती दी। हांसी के स्कीनर बंधुओं के खिलाफ किसानों के संघर्ष और लोहारू रियासत के नवाब के विरुद्ध किसान आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चौधरी लाजपत राय अलखपुरा सहित अनेक किसान नेताओं ने उनके संघर्ष में सहयोग किया। इस क्षेत्र में किसान आंदोलन और राजनीतिक चेतना को मजबूत करने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा।

 वक्ताओं ने कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा के प्रयासों से महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, मदन मोहन मालवीय, अली बंधुओं और कस्तूरबा गांधी जैसे राष्ट्रीय नेता भिवानी आए। अक्टूबर 1920 और फरवरी 1921 में भिवानी में हुई बड़ी किसान रैलियों ने क्षेत्र के लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि आज देश में कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली नीतियां लागू की जा रही हैं, जिनका खामियाजा किसान और मजदूर भुगत रहे हैं। देशी-विदेशी पूंजी के गठजोड़ के बीच आम जनता के हितों को पीछे धकेला जा रहा है। दूसरी ओर धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशें हो रही हैं तथा सामाजिक बराबरी और भाईचारे को कमजोर किया जा रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव आंबेडकर और शहीद भगत सिंह सहित स्वतंत्रता आंदोलन के महान नेताओं का सपना था कि देश का कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, युवाओं को रोजगार मिले तथा किसान और मजदूर खुशहाल हों। डॉ. आंबेडकर का सामाजिक न्याय और समानता का सपना भी इसी संघर्ष का अभिन्न हिस्सा था। आज इन सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष को और तेज करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह पंडित नेकीराम शर्मा ने अंग्रेजी हुकूमत, साम्राज्यवाद, बेगार प्रथा, जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ संघर्ष किया, उसी तरह आज उनकी प्रेरणा, विरासत और आदर्शों को लेकर आर्थिक समानता, सामाजिक न्याय, किसान-मजदूर अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी की लड़ाई को आगे बढ़ाना होगा। इसी संकल्प के साथ पंडित नेकीराम शर्मा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर  महिला नेत्री सन्तोष देशवाल , कर्मचारी नेता नरेश शर्मा, रतन जिंदल, कामरेड रवि खन्ना , महेंद्र तंवर व प्रताप सिंह सिंघमार, डा. सुमेर सिंह , मजदूर नेता अमीर सिंह, महिला  तथा मजदूर नेता उपासना सिंह , सामाजिक कार्यकर्ता भूप सिंह प्रजापति , चन्द्रभान शर्मा  सहित अनेक साथी उपस्थित रहे ।