चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया 

 
चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया 

भिवानी ।

चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में युवा कल्याण विभाग एवं हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कुलपति प्रो दीप्ति धर्माणी की अध्यक्षता एवं कुलसचिव डॉ भावना शर्मा की विशेष उपस्थिति में मनाया गया ।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं पूर्व कुलपति प्रो राज नेहरू ने बतौर मुख्य अतिथि तथा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष पूर्व कुलपति डॉ कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि पूर्व सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी, एडवोकेट सोहन लाल मक्कड़, नेवी से सेवानिवृत अधिकारी रमेश चंद्र पधारे।  

कार्यक्रम के संयोजक डॉ सुरेश मलिक एवं कार्यक्रम सचिव डॉ सोनल शेखावत थे। बतौर मुख्य अतिथि ओएसडी एवं पूर्व कुलपति प्रो राज नेहरू ने कहा कि मैं इस विभाजन की पीड़ा को भली भांति समझ सकता हूं क्योंकि मेरा जन्म जम्मू कश्मीर में हुआ है और हमने भी घर बार सबकुछ छोड़कर कई वर्ष टेंट में गुजारे हैं।

युवा अपने पूर्वजों की इस पीड़ा को अनुभव करें और यह संकल्प लें कि इस तरह की दर्दनाक विभीषिका की पुनर्वृति ना हो। भारत की प्राचीन सभ्यता विश्व में सबसे अनूठी थी जिसे विश्व भर से लोग देखने आते थे। विश्व के कई सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों ने माना है कि प्राचीन काल में भारत की जीडीपी विश्व की कुल जीडीपी का 35 से 50 प्रतिशत थी। हमारी शैक्षिक एवं आर्थिक स्थिति कितनी समृद्ध एवं सुदृढ़ होती थी।

उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास गौरवशाली रहा है। हमारी वीरांगनाओं ने दुश्मनों को नाकों चने चबवाए हैं। आज भारत विश्व पटल पर प्रमुख शक्ति के रूप में बड़ी तेजी से उभर रहा है और यह विश्व की दूसरी शक्तियों को सहन नहीं होगा। शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जो भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करेगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने हमें 2047 के शक्तिशाली एवं विकसित भारत का विजन दिया है।उन्होंने अमेरिका की मनोवैज्ञानिक दशा पर विचार रखे।

पूर्व कुलपति प्रो कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि यह देश का विभाजन न होकर  दो प्रांतों पंजाब और बंगाल का विभाजन था।  1857 में पूरा हिंदुस्तान अंग्रेजों के खिलाफ लड़े। हिंदुस्तान की ताकत से घबराए अंग्रेजों ने फुट डालो राज करो कि नीति अपनाई। अंग्रेजों ने हिंदुस्तान को कमजोर करने के लिए भारत के विभाजन का षड्यंत्र रचा था। अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली और संस्कृति को तहस नहस करने का षड्यंत्र रचा ताकि भारत को कमजोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि 800 साल के बाद भी भारत की आत्मा जिंदा है।

उन्होंने विभाजन विभीषिका पर विस्तृत जानकारी दी और आह्वान किया कि हम सभी संगठित होकर पूर्ण समर्पित भाव से राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानते हुए कार्य करें। कुलपति प्रो दीप्ति धर्माणी ने अपने  संबोधन में कहा कि हम एकजुट एवं संगठित रूप से चुनौतियों पर पार पा सकते हैं।हम यदि संगठित रहेंगे तो हमें कोई हरा नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका में महिलाओं ने दोहरी विभीषिका झेलनी पड़ी ।

विभाजन विभीषिका के दौरान लगभग 35 हजार महिलाओं से बलात्कार एवं यौन अत्याचार किए गए और जैसे तैसे वो वापिस घर लौटी तो उन्हें परिवारों ने स्वीकार नहीं किया जो उनके लिए बहुत दर्दनाक एवं पीड़ादायक था। उन्होंने कहा कि की हम संगठित हो राष्ट्र निर्माण के भागीदार बनें।
डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ सुरेश मलिक ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया और देश विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विस्तृत जानकारी दी। देश विभाजन विभीषिका के पीड़ित परिवारों से वरिष्ठ अधिवक्ता सोहन लाल मक्कड़ ने तथा नेवी सेवानिवृत अधिकारी रमेश चंद्र ने भी विभाजन विभीषिका की पीड़ा पर अपने अनुभव साझा किए।

इस कार्यक्रम में देश विभाजन विभीषिका पर अंतरनाद नामक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई और कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने देश विभाजन विभीषिका में कुर्बानी देने वाले लोगों को याद कर उन्हें भावपूर्ण श्रृद्धांजलि अर्पित की गई। कुलसचिव डॉ भावना शर्मा ने सभी अतिथियों एवं कार्यक्रम सहभागियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर  प्रो डीके मदान, पूर्व कुलसचिव डॉ जितेन्द्र भारद्वाज,प्रो संजीव कुमार,प्रो सुनीता भरतवाल,प्रो विपिन जैन,प्रो अमर सिंह,डॉ स्नेहलता शर्मा,सहित अनेक शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।