Commonwealth Games Gold Medalists: भिवानी की बेटियों प्रिया घणघस और साक्षी चौधरी ने बॉक्सिंग में रचा इतिहास, धनाना में मनाई होली

स्कॉटलैंड कॉमनवेल्थ खेलों में बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली भिवानी की बेटियों प्रिया घणघस और साक्षी चौधरी का गांव धनाना में रंग-गुलाल और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया।

 
भिवानी न्यूज़ टुडे

- प्रिया घणघस और साक्षी चौधरी के स्वागत में उमड़ा गांव धनाना, रंग-गुलाल उड़ाकर किया खुशी का इजहार


- ग्रामीणों ने स्वर्ण पदक विजेता खिलाडिय़ों पर की पुष्प वर्षा, गांव में बना होली सा माहौल


- गांव धनाना की बेटी प्रिया घणघस और साक्षी चौधरी ने कॉमनवेल्थ खेलों में बॉक्सिंग में जीते हैं स्वर्ण पदक


- विधायक कपूर सिंह वाल्मीक ने सम्मान समारोह में पहुंच कर दिया पदक विजेता बेटियों को अपना आशीर्वाद


भिवानी, 06 अगस्त।  गांव धनाना में गुरुवार को होली सा माहौल बना। बॉक्सिंग में देश को एक नहीं बल्कि दो-दो स्वर्ण पदक देने वाला जिला भिवानी का गांव धनाना आज न केवल हरियाणा या भारत देश में बल्कि पूरे विश्व में सुर्खियों में है। अपने गोल्डन पंच से भारत देश का तिरंगा विश्व में बुलंद करने वाली साक्षी चौधरी और प्रिया घणघस जैसे ही अपने पैतृक गांव धनाना में पहुंची तो पूरा गांव उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। ग्रामीणों ने अपनी लाडलियों को सिर आंखों पर बैठाया। दोनों बेटियों का गांव में विजयी जुलूस निकाला गया, विजयी जुलूस में भारी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। लोगों ने रंग-गुलाल उड़ाकर और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी मनाई। इस दौरान ग्रामीणों ने होनहार खिलाडिय़ों पर पुष्प वर्षा की। वहीं साक्षी चौधरी और प्रिया घनघस ने अपनी उपलब्धि को राष्ट्र के नाम किया। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी बेटियों के सपनों को साकार करने की उड़ान भरने दें और आगे बढऩे के अवसर दें।


 गांव के सर्व जातीय जाटू खाप के चबूतरे पर आयोजित सम्मान समारोह में अनेक सामाजिक संस्थाओं और गणमान्य नागरिकों ने स्वर्ण पदक विजेता बेटियोंं को नगद राशि भेंट कर, और फूल मालाओं से सम्मान किया गया। गांव में देशी घी के लड्डू और जलेबी खिलाई। सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए बवानी खेड़ा के विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि ने कहा कि धनाना गांव की बेटी प्रिया घणघस और साक्षी चौधरी ने पूरे विश्व में अपने गांव, हल्का, जिला और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि यह बड़े गर्व की बात है बवानी खेड़ा हल्के से गांव धनाना, मिताथल और बडेसरा से खिलाडय़िों ने कॉमनवेल्थ में चार मेडल देश के लिए जीते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार निरंतर खेलों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई के साथ साथ खेलों में भाग लेने का आह्वान किया।

उल्लेखनीय है कि स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में 23 जुलाई से दो अगस्त तक आयोजित कॉम्रवेल्थ खेलों में बॉक्सिंग खेल में साक्षी चौधरी ने 51 कि.ग्रा. और प्रिया घणघस 60 कि.ग्रा. भारवर्ग में प्रतिद्वंद्वी खिलाडिय़ों को धूल चटाई और स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। दोनों बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। गोल्ड मेडल जीतने के बाद से ही परिजनों के साथ-साथ ग्रामीण भी दोनों बेटियों के गांव में लौटने के इंतजार में थे। गुरुवार को दोनों खिलाड़ी भिवानी से खुली जीप में सवार होकर गांव में पहुंची, जहां गांव के लोग पूरे उत्साह, जोश और उमंग के साथ पलकें बिछाए इंतजार में थे। गांव पहुंचते ही परिजनों के अलावा ग्रामीणों ने प्रिया और साक्षी के स्वागत में जोरदार नारे लगाए। ग्रामीणों ने फूल मालाओं व पुष्प वर्षा से जोरदार स्वागत किया। वहीं गगनभेदी नारों से पूरा माहौल देखते ही बना। पूरा गांव विजयी आवरण में नजर आया। ग्रामीणों द्वारा दोनों खिलाडिय़ों का गांव में चारों ओर विजयी जुलूस निकाला।

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- अनुशासन और कड़ी मेहनत के साथ निरंतर अभ्यास सफलता का परिणाम

ग्रामीणों द्वारा किए गए भव्य और यादगार स्वागत से गदगद प्रिया घणघस ने कहा कि सफलता केवल कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से मिलती है। वे प्रतिदिन सुबह तीन घंटे और शाम तीन घंटे अभ्यास करती हैं। प्रिया के पिता महेंद्र एक जमींदार (किसान) हैं, जबकि उनकी माता मीरा गृहिणी हैं। प्रिया ने कहा कि उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। उनके बड़े भाई नीरज अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर हैं और बहन नीरू पढ़ाई कर रही हैं। प्रिया का कहना है कि उनकी हर फाइट से पहले वह अपने बड़े भाई नीरज से जरूर बात करती हैं और उनकी सलाह उन्हें आत्मविश्वास देती है। प्रिया ने वर्ष 2015-16 में मुक्केबाजी की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि बचपन में भाई-बहनों के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़ा होता था, जिसके चलते परिवार ने उन्हें बॉक्सिंग अकादमी भेज दिया। वहीं से उनके खेल जीवन की शुरुआत हुई और आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।


प्रिया ने वर्ष 2023 में कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित यूथ एवं जूनियर एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक, चीन में आयोजित मल्टीनेशनल यूथ ट्रेनिंग कैंप में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2025 में थाईलैंड ओपन टूर्नामेंट में कांस्य तथा बैंकॉक में आयोजित अंडर-22 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किया।


प्रिया घणघस ने अनेक पदक देश की झोली में डालें हैं। वर्ष 2026 प्रिया के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। उन्होंने स्पेन में आयोजित बॉक्साम कप में स्वर्ण पदक, चेक गणराज्य में आयोजित ग्रैंड प्रिक्स टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक, मंगोलिया में आयोजित सीनियर एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में उन्होंने कनाडा की खिलाड़ी को 4-1 के अंतर से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे भारत, उनके परिवार और विशेष रूप से उनके बड़े भाई के सहयोग का परिणाम है।


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- युवाओं को दिया नशे से दूर रहने का संदेश
प्रिया के अनुसार नशा और खेल एकसाथ नहीं चल सकते। सफलता मेहनत, अनुशासन और फिटनेस से मिलती है, न कि नशे से। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नशे से दूर रहें, खेलों और सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ें तथा अपने परिवार और देश का नाम रोशन करें।

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- एक साधारण किसान परिवार में पली-बढ़ी है साक्षी चौधरी

साक्षी चौधरी एक साधारण किसान परिवार में पली बढ़ी है। वर्ष 2012 में मुक्केबाजी की शुरुआत करने वाली साक्षी चौधरी आज किसी पहचान की मोहताज नही है। उनके मुक्के का दम पूरी दुनिया ने देखा है। साक्षी के पिता मनोज कुमार किसान हैं, जबकि माता शीला गृहिणी हैं। उनके बड़े भाई भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं। साक्षी का कहना है कि परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने का आत्मविश्वास दिया और सफलता की राह आसान बनाई। अपने खेल के शानदार सफलता के सफर में साक्षी ने वर्ष 2017 में आयोजित यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2025 में इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा उसी वर्ष कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद वर्ष 2026 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।


साक्षी ने कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनके माता-पिता, भाई, कोच और पूरे परिवार का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि हर उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण छिपा होता है।
युवाओं के नाम संदेश देते हुए साक्षी ने कहा कि नशा जीवन और खेल दोनों का सबसे बड़ा दुश्मन है। यदि युवा अपने जीवन में सफलता हासिल करना चाहते हैं तो उन्हें नशे से दूर रहकर खेलों और सकारात्मक गतिविधियों से जुडऩा चाहिए। स्वस्थ शरीर और मजबूत इरादे ही सफलता की असली पहचान हैं।


सम्मान समारोह में सांसद धर्मवीर सिंह के सुपुत्र मोहित चौधरी, पूर्व आईजी राजपाल सिंह, जुलाना के पूर्व विधायक अमरजीत ढांडा, दलीप सिंह चेयरमैन धनाना, जाटू खाप प्रधान भीम सिंह मिताथल, कोच जगदीश सिंह, जिला खेल अधिकारी विद्यानंद यादव, भिवानी बॉक्सिंग क्लब प्रधान कमल सिंह, रामदेव तायल सहित खिलाडिय़ों के कोच, परिजन, विभिन्न खापों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।