100 वर्ष पूर्ण होने पर भिवानी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भव्य पथ संचलन आयोजित
भिवानी:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वीरवार को भिवानी शहर संघमय हो गया। विजयादशमी के अवसर पर शहर के 7 विभिन्न स्थानों से भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसमें एक हजार से अधिक स्वयं सेवकों तथा 600 से अधिक नागरिकों ने भाग लिया तथा अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति का सशक्त प्रदर्शन किया।
पथ संचलन के दौरान विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्प वर्षा व भारत माता की जय के नारों के साथ स्वागत किया। शहर के विभिन्न 7 स्थानों से शुरू हुए पथ संचलन कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता सुरेश पाल, रमेश सांगा, सुनील राजगढ़, ईश्वर मित्तल, प्रचारक जितेंद्र, चंद्र भूषण व प्रचारक सचिन रहे तथा कार्यक्रम को संबोधित किया।
वही कार्यक्रम में सान्निध्य बालयोगी महंत चरणदास व डा. अशोक गिरी महाराज का रहा। वही पवन मित्तल, डा. रमेश खासा, योगेंद्र बोहरा, रेखा सैनी, अदमवीर, पुलकित पाहुजा व सुमन ने अलग-अलग कार्यक्रमों की अध्यक्षता की। कार्यक्रम के आयोजन में प्रशासन का भी पूरा सहयोग रहा।
वक्ताओं ने बताया कि संघ कार्य की दृष्टि से भिवानी को 7 उपनगरों में वर्गीकृत किया गया था और संघ की शताब्दी वर्षगांठ को चिह्नित करते हुए यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम इन सभी उपनगरों में आयोजित किया गया।
उन्होंने जानकारी दी कि मुख्य रूप से वैश्य मॉडल स्कूल, जनसेवा स्कूल, हनुमान जोहड़ी धाम, कमला भवन, और श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर जैसे स्थानों से अलग-अलग पथ संचलन शुरू हुआ तथा विभिन्न मार्गो से होती हुई जहां से शुरू वही पर संपन्न हुई। मार्ग में शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र स्वयंसेवकों की दृढ़ चाल, अनुशासनबद्ध कदम और राष्ट्रगीतों की धुन थी। कार्यक्रम की भव्यता में और वृद्धि इस तथ्य से हुई कि इसमें विभिन्न आयु वर्ग के स्वयंसेवकों ने एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया और राष्ट्रहित के प्रति अपने संकल्प को प्रकट किया।
वक्ताओं ने कहा कि इस कार्यक्रम ने संघ की परंपरा के अनुसार अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति का मजबूत प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि इस विशाल पथ संचलन को देखकर नगरवासियों ने न केवल संगठन की शक्ति का अनुभव किया, बल्कि इस आयोजन ने समाज में एकता और सद्भाव का भी एक सशक्त संदेश दिया।
इस भव्य आयोजन में नगरवासियों ने भी बढ़-चढक़र भाग लिया, जिससे शहर में संघ के शताब्दी वर्ष को एक यादगार और प्रेरणादायक रूप से चिह्नित किया गया।
उन्होंने कहा कि पथ संचलन का उद्देश्य केवल एक अनुशासनबद्ध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत संदेश है कि संगठित समाज ही मजबूत राष्ट्र की नींव रख सकता है।
आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह आयोजन हमें एकजुट रहने और अपनी परंपराओं, संस्कृति तथा मूल्यों के संरक्षण की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने देशभक्ति गीतों के माध्यम से वातावरण को देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत किया। 100 वर्ष पूर्ण होने पर भिवानी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भव्य पथ संचलन आयोजित
आरएसएस के पथ संचलन में करीबन एक हजार स्वयं सेवक व 600 नागरिकों ने लिया हिस्सा
आरएसएस के पथ संचलन ने दिया देशभक्ति व एकता का संदेश, नागरिकों ने पुष्प वर्षा से किया स्वागत
पथ संचलन ने दिया संगठित समाज द्वारा मजबूत राष्ट्र की नींव रखने का संदेश : पथ संचलन वक्तागण
भिवानी, 02 अक्तूबर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वीरवार को भिवानी शहर संघमय हो गया।
विजयादशमी के अवसर पर शहर के 7 विभिन्न स्थानों से भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसमें एक हजार से अधिक स्वयं सेवकों तथा 600 से अधिक नागरिकों ने भाग लिया तथा अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति का सशक्त प्रदर्शन किया। पथ संचलन के दौरान विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्प वर्षा व भारत माता की जय के नारों के साथ स्वागत किया। शहर के विभिन्न 7 स्थानों से शुरू हुए पथ संचलन कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता सुरेश पाल, रमेश सांगा, सुनील राजगढ़, ईश्वर मित्तल, प्रचारक जितेंद्र, चंद्र भूषण व प्रचारक सचिन रहे तथा कार्यक्रम को संबोधित किया। वही कार्यक्रम में सान्निध्य बालयोगी महंत चरणदास व डा. अशोक गिरी महाराज का रहा। वही पवन मित्तल, डा. रमेश खासा, योगेंद्र बोहरा, रेखा सैनी, अदमवीर, पुलकित पाहुजा व सुमन ने अलग-अलग कार्यक्रमों की अध्यक्षता की। कार्यक्रम के आयोजन में प्रशासन का भी पूरा सहयोग रहा।
वक्ताओं ने बताया कि संघ कार्य की दृष्टि से भिवानी को 7 उपनगरों में वर्गीकृत किया गया था और संघ की शताब्दी वर्षगांठ को चिह्नित करते हुए यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम इन सभी उपनगरों में आयोजित किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि मुख्य रूप से वैश्य मॉडल स्कूल, जनसेवा स्कूल, हनुमान जोहड़ी धाम, कमला भवन, और श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर जैसे स्थानों से अलग-अलग पथ संचलन शुरू हुआ तथा विभिन्न मार्गो से होती हुई जहां से शुरू वही पर संपन्न हुई। मार्ग में शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र स्वयंसेवकों की दृढ़ चाल, अनुशासनबद्ध कदम और राष्ट्रगीतों की धुन थी। कार्यक्रम की भव्यता में और वृद्धि इस तथ्य से हुई कि इसमें विभिन्न आयु वर्ग के स्वयंसेवकों ने एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया और राष्ट्रहित के प्रति अपने संकल्प को प्रकट किया।
वक्ताओं ने कहा कि इस कार्यक्रम ने संघ की परंपरा के अनुसार अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति का मजबूत प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि इस विशाल पथ संचलन को देखकर नगरवासियों ने न केवल संगठन की शक्ति का अनुभव किया, बल्कि इस आयोजन ने समाज में एकता और सद्भाव का भी एक सशक्त संदेश दिया।
इस भव्य आयोजन में नगरवासियों ने भी बढ़-चढक़र भाग लिया, जिससे शहर में संघ के शताब्दी वर्ष को एक यादगार और प्रेरणादायक रूप से चिह्नित किया गया।
उन्होंने कहा कि पथ संचलन का उद्देश्य केवल एक अनुशासनबद्ध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत संदेश है कि संगठित समाज ही मजबूत राष्ट्र की नींव रख सकता है। आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह आयोजन हमें एकजुट रहने और अपनी परंपराओं, संस्कृति तथा मूल्यों के संरक्षण की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने देशभक्ति गीतों के माध्यम से वातावरण को देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत किया।

