रूस ने 25 साल में पहली बार बेचा अपना सोना, 4 साल के निचले स्तर पर गोल्ड रिजर्व

आर्थिक दबाव में रूस! 25 साल में पहली बार केंद्रीय बैंक ने शुरू की सोने की बिक्री। सैन्य खर्च और बजट घाटे के कारण गोल्ड रिजर्व 4 साल के निचले स्तर पर। जानें ताज़ा आंकड़े।

 
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर रूस का प्रभाव

रूस ने बढ़ते बजट घाटे और लगातार सैन्य खर्च के दबाव के बीच अपने केंद्रीय बैंक के भंडार से सोना बेचना शुरू कर दिया है. पिछले 25 वर्षों में यह पहली बार है जब देश ने इस तरह का कदम उठाया है, जिसे रिज़र्व प्रबंधन में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

बढ़ते सैन्य खर्च का असर

रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय से जारी सैन्य खर्च ने सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ा दिया है. इसी के चलते सरकार को अपने सोने और विदेशी मुद्रा भंडार का सहारा लेना पड़ रहा है, ताकि बजट घाटे को नियंत्रित किया जा सके.

चार साल के निचले स्तर पर गोल्ड रिज़र्व

लगातार बिक्री के कारण रूस के गोल्ड रिज़र्व अब पिछले चार वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. यह संकेत है कि आर्थिक दबाव गहराता जा रहा है और सरकार को अपने सुरक्षित माने जाने वाले भंडार तक का उपयोग करना पड़ रहा है.

भारी मात्रा में बिक्री

आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच सोना और विदेशी मुद्रा मिलाकर 15 ट्रिलियन रूबल (करीब 150 अरब डॉलर) से अधिक की बिक्री की गई. वहीं 2026 के पहले दो महीनों में ही अतिरिक्त 3.5 ट्रिलियन रूबल (35 अरब डॉलर) के भंडार बेचे जा चुके हैं.

जनवरी-फरवरी में तेज़ बिक्री

सेंट्रल बैंक ऑफ रूस के डेटा के मुताबिक, जनवरी 2026 में करीब 3 लाख औंस सोना बेचा गया, जबकि फरवरी में 2 लाख औंस की अतिरिक्त बिक्री की गई. यह रफ्तार बताती है कि वित्तीय दबाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, रूस का यह कदम दर्शाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू आर्थिक दबावों के बीच देश अपनी वित्तीय रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है, जिसका असर आगे चलकर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.