Human Rights Anti Corruption Council: सीजेआई से सफाई कर्मियों के हक में हस्तक्षेप की मांग, ठेका प्रथा खत्म करने पर जोर

सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और मांगों को लेकर ह्यूमन राइट्स एंटी करप्शन काउंसिल ने सीजेआई को लिखा पत्र।
 
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सफाई कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर ह्यूमन राइट्स एंटी करप्शन काउंसिल ने खोला मोर्चा, सीजेआई को पत्र लिखकर लगाई न्याय की गुहार

कर्मचारियों को उनके बुनियादी अधिकारों और जरूरी सुविधाओं से वंचित रखने मानवाधिकारों का है उल्लंघन : एडवोकेट शिव कुमार बेडवाल

भिवानी, 06 सितंबर : समाज और आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा में दिन-रात जुटे रहने वाले सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, सम्मान और वर्षों से लंबित मांगों को लेकर अब कानूनी और मानवाधिकार स्तर पर आवाज उठने लगी है। ह्यूमन राइट्स एंटी करप्शन काउंसिल ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र भेजा। पत्र के जरिए काउंसिल ने देश के सर्वोच्च न्यायालय से इस गंभीर विषय पर स्वत: संज्ञान लेने और सफाई कर्मियों के हित में उचित दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। काउंसिल ने मांग की कि हरियाणा में सफाई कर्मचारी बहुत दिनों से हड़ताल पर है। उनकी मांगो को माना जाना उचित है। क्योंकि हड़ताल के कारण शहरों में सफाई के ढेर लगे हुए है, जिससे बहुत सी बीमारी फैल रही है।

काउंसिल के चेयरमैन एडवोकेट शिव कुमार बेडवाल ने कहा कि सफाई कर्मचारी समाज के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी स्वच्छता व्यवस्था को सुचारू रखते हैं। इसके बावजूद लंबे समय से सेवा दे रहे इन कर्मचारियों को उनके बुनियादी अधिकारों और जरूरी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक स्थिति है। पत्र में मुख्य रूप से सफाई व्यवस्था से ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने, कर्मियों को सीधी एवं स्थायी नियुक्ति प्रदान करने तथा सरकार द्वारा समय-समय पर दिए गए आश्वासनों को धरातल पर लागू करवाने की मांग उठाई गई है। काउंसिल ने सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि संबंधित सरकारों और विभागों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए पाबंद किया जा सके।

एडवोकेट शिव कुमार बेडवाल ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की इन समस्याओं को सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था के चश्मे से नहीं, बल्कि बुनियादी मानवीय अधिकारों और सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से महिला सफाई कर्मचारियों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा, सम्मान और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का तुरंत स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ह्यूमन राइट्स एंटी करप्शन काउंसिल का मूल उद्देश्य भारतीय संविधान और कानून के दायरे में रहकर हर नागरिक के मानवाधिकारों की रक्षा करना है। जब देश की स्वच्छता की नींव रखने वाले कर्मचारियों की जायज और बुनियादी मांगें पूरी होंगी, तभी उनका मनोबल बढ़ेगा और इसका सीधा सकारात्मक असर पूरे देश की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ेगा। काउंसिल ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि वे इस संवेदनशील विषय पर संज्ञान लेते हुए केंद्र व संबंधित राज्य सरकारों को आवश्यक निर्देश दें।