Seema Kaliraman Discus Throw: विवाह के अगले दिन प्रैक्टिस से राष्ट्रमंडल पदक तक, जानें एथलीट सीमा कालीरमन का प्रेरक सफर
राष्ट्रमण्डल खेलों में डिस्कस थ्रो प्रतिशपर्धा कांस्य हासिल करने वाली सीमा कालीरमन को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
सीमा का सम्मान समुचे सीबीएलयू के लिए गौरवपूर्ण: प्रो. दीप्ति धर्माणी
भिवानी, 27 अगस्त। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश की शान बढ़ाने वाली चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय की शोधार्थी एवं एथेलीट सीमा कालीरमन को जब कल पंचकूला में आयोजित राज्यस्तरीय सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सम्मानित किया तो पूरे विश्वविद्यालय में खुशी की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री ने सीमा को प्रदेश सरकार की खेल नीति के तहत 50 लाख रूपये के ईनाम से पुरस्कृत किया। विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. दीप्ति धर्माणी भी इस अवसर पर मौजूद रही।
गौरतलब है कि गलास्गो राष्ट्रमण्डल खेलों में सीमा ने डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतकर भारत, हरियाणा और विश्वविद्यालय का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपनी खेलों को बढ़ावा देने की निति के तहत सीमा कालीरमन को 1 लाख रूपया का पुरस्कार दिया है।
वर्ष 2019 में सीमा कालीरमन का विवाह हुआ, लेकिन शादी उनके खेल के रास्ते की बाधा नहीं बनी। डिस्कस थ्रो के प्रति उनका जुनून इतना था कि विवाह के अगले ही दिन वह अभ्यास के लिए मैदान में पहुंच गई थी। उस दिन घर पर रिश्तेदार और परिचित नवविवाहित जोड़े को बधाई देने आ रहे थे, लेकिन सीमा स्टेडियम में पसीना बहा रही थीं। उनके लिए हर दिन की प्रैक्टिस उतनी ही महत्वपूर्ण थी जितना उनका सपना।
यही अनुशासन उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं की सूची तक लेकर आया। इसके बाद कोरोना महामारी का कठिन दौर आया। पूरे देश में लॉकडाउन लगा, खेल गतिविधियां ठप्प हो गईं और खिलाड़ी घरों तक सीमित हो गए, लेकिन सीमा ने उस चुनौती को भी अपने इरादों पर हावी नहीं होने दिया। कोरोना काल में भी उन्होंने एक भी दिन अभ्यास नहीं छोड़ा। मैदान उपलब्ध न होने पर उन्होंने घर और आसपास उपलब्ध संसाधनों के सहारे फिटनेस, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और तकनीकी अभ्यास जारी रखा। उनका मानना था कि एक दिन की भी लापरवाही वर्षों की मेहनत पर भारी पड़ सकती है।
सीमा के जीवन में विवाह के बाद नई जिम्मेदारियां आईं और बाद में वह एक बेटे की मां भी बनी। इसके बावजूद उन्होंने खेल से दूरी नहीं बनाई। परिवार, मातृत्व, पीएचडी की पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी इन सभी जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य पर पूरा फोकस बनाए रखा।
उनकी इस यात्रा में उनके पति रविन्द्र सबसे मजबूत सहारा बने। रविन्द्र केवल उनके जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि उनके कोच भी हैं। उन्होंने हर कठिन दौर में सीमा का मार्गदर्शन किया और उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। पति और कोच की इस जोड़ी की मेहनत का ही परिणाम है कि आज सीमा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए कांस्य पदक जीता है।
कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा सीमा को सम्मानित करने के पल उनके तथा समुचे विश्वविद्यालय के लिए गौरवशाली है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा से प्ररेणा पाकर और उदयीमान खिलाड़ी व छात्र विभिन्न क्षेत्रों में विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने सम्मान के लिए मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ खेल प्रतिभाओं को भी निरंतर प्रोत्साहित करता है। सीमा की उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स का यह कांस्य पदक केवल भारत की खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि एक ऐसी खिलाड़ी की प्रेरणादायक यात्रा का सम्मान है जिसने बॉक्सिंग से शुरुआत की, डिस्कस थ्रो में पहचान बनाई, 2019 में विवाह के अगले ही दिन अभ्यास पर पहुंची, कोरोना काल में एक दिन भी प्रैक्टिस नहीं छोड़ी, मातृत्व के बाद भी खेल जारी रखा और अपने पति व कोच रविन्द्र के साथ मिलकर विश्व मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाया।