SC Hearing on Delhi Protest: मेट्रो-ट्रेन रोकने और इंटरनेट बाधित करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अवमानना याचिका पर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए। साथ ही मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बाधित करने पर केंद्र को नोटिस जारी किया है।

 
Justice Joymalya Bagchi

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों को हिरासत में लेने और यातायात सेवाएं बाधित होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने वाले नागरिकों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए। इसके साथ ही, अदालत ने उस याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के चलते मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक न लगाने संबंधी पूर्व के निर्देशों के कथित उल्लंघन को लेकर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया गया है।

🚇 जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल को दिए निर्देश, मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं रहें सुचारू

जस्टिस जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत के साथ-साथ दिल्ली मेट्रो अपनी सामान्य समय-सारिणी के अनुसार चले और इंटरनेट सेवाएं भी बाधित न की जाएं। पीठ ने 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन और 10 अक्टूबर को बड़ी संख्या में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के आरोपों का संज्ञान लिया। वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन बंद रहे और निषेधाज्ञा के दायरे से बाहर के इलाकों से भी लोगों को परेशान किया गया।

🛡️ वकीलों और पत्रकारों के पेशेवर कर्तव्यों में न आए रुकावट, कोर्ट ने दिए स्पष्ट निर्देश

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों में से केवल 45 स्थानों पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधित किया गया था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन से बिल्कुल न रोका जाए। अदालत इस मामले में दिए गए निर्देशों के कथित उल्लंघन पर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही के अनुरोध वाली याचिका पर सभी पक्षों को अपनी दलीलें रखने का पूरा अवसर देगी।