शहर का फेफड़ा कहे जाने वाले हुडा पार्क की हालत बदतर
भिवानी:
शहर का फेफड़ा कहे जाने वाले सबसे बड़े हुडा पार्क की हालत आज इस कदर बदतर हो चुकी है कि यहां सैर करना तो दूर, सांस लेना भी दूभर हो गया है। वेटरन संगठन भिवानी के प्रधान सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल बामला ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे भ्रष्टाचार का जीता-जागता नमूना करार दिया है।
उन्होंने कहा कि पार्क आज प्रशासन की उदासीनता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। यदि समय रहते मुख्यमंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो यह सार्वजनिक संपत्ति पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो जाएगी।
सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल बामला के अनुसार हुडा पार्क की दुर्दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 12 वर्षों से यहां के शौचालय बंद पड़े हैं। एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के मुख्य पार्क में बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रशासन की पोल खोल रहा है। पार्क की तारें और रैलिंग टूट चुकी हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था नाममात्र की रह गई है। टूटे हुए फुटपाथ (फुट स्टेप) बुजुर्गों और बच्चों के लिए हर कदम पर हादसे का कारण बन रहे हैं।
पार्क के सौंदर्य को बढ़ाने के लिए लगाया गया फव्वारा लंबे समय से खराब है। वर्तमान में यह केवल गंदे पानी के जमाव और मच्छरों के पनपने का केंद्र बनकर रह गया है। पार्क में सबसे अधिक संख्या बुजुर्गों की होती है, लेकिन प्रशासन ने उन्हें राम भरोसे छोड़ दिया है। यहां बैठने के लिए उचित बेंच नहीं हैं, पीने के शुद्ध पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, सफाई कर्मचारी महीनों तक दिखाई नहीं देते, जिससे गंदगी के अंबार लगे हुए हैं।
सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल बामला ने आरोप लगाते हुए कहा कि पार्क के पुराने और बड़े पेड़ों को काटकर अवैध रूप से बेच दिया गया। अब केवल पैसा डकारने के उद्देश्य से नए पेड़ लगाने के नाम पर टेंडर जारी किए जा रहे हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का खुला दुरुपयोग है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कोई नागरिक सरकार की कमियां उजागर करता है तो समस्या सुधारने के बजाय शिकायतकर्ता के खिलाफ ही कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
भाजपा सरकार कमियों को छिपाने के लिए डराने-धमकाने की राजनीति कर रही है। उन्होंने जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री से मांग की कि हुडा पार्क में बंद पड़े शौचालयों को तुरंत चालू कर उनकी सफाई सुनिश्चित की जाए, टूटी रैलिंग, फुटपाथ और फव्वारा सिस्टम को जल्द ठीक किया जाए, नियमित सफाई के लिए स्थाई कर्मचारियों की तैनाती हो तथा पेड़ों की कटाई और टेंडर प्रक्रिया में हुए कथित भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच हो।

