जी राम जी योजना का नाम सात बार पहले भी बदला जा चुका, विपक्ष को नहीं होना चाहिए कोई ऐतराज : सांसद
भिवानी
भिवानी-महेंद्रगढ़ से सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा कि ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने व मजदूरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित भारत : जी राम जी योजना मील का पत्थर साबित होगी। क्योंकि अब इस योजना के तहत 100 की बजाए 125 दिन रोजगार दिया जाएगा।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस योजना के तहत जो नया कानून बनाया गया है, उसमें 365 में से 60 दिन मजदूरों को अन्य रोजगार करने का अवसर मिलेगा। यह वह 60 दिन होंगे, जब साल में आने वाले दोनों फसलों की कटाई का समय होता है। ऐसे में जी राम जी योजना के तहत पंजीकृत कामगार खेतों में अधिक दिहाड़ी फसल काटकर प्राप्त कर सकेंगे। बाकी 300 दिन में से 125 दिन रोजगार दिया जाएगा। यह बात उन्होंने आज भिवानी में जी राम जी योजना को लेकर एक जिला स्तरीय सम्मेलन के दौरान कही। इस दौरान भिवानी जिला के विभिन्न पंच, सरपंच, ग्राम सचिव व ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे।
सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा कि पहले मनरेगा योजना के तहत सिर्फ मिट्टी से जुड़े कच्चे कार्य किए जाते थे। अब जी राम जी योजना के तहत पक्के कार्य करवाएं जाएंगे। जिनमें जल संसाधन, रोड़ आंगनबाड़ी के अलावा गांव की जरूरत के हर विकास कार्य को वीबी जी राम जी योजना के तहत करवाया जा सकेंगा।
इस मौके पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा कि इस योजना का नाम पहली बार नहीं बदला गया, बल्कि 7 बार पहले भी इस योजना का नाम बदला जा चुका है। 1977 में काम के बदले अनाज, 1992 में जीआरवाई, उसके बाद इंपलाईमेैट इंश्योरेंस स्कीम, 2005 में नरेगा, उसके बाद मनरेगा के नाम से जानी जाती थी।
ऐसे में नाम को लेकर विपक्षी दलों को ऐतराज नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ विरोध के लिए विपक्षी दल ऐतराज जता रहे है। जबकि योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है। पत्रकारों द्वारा इस योजना का 40 प्रतिशत शेयर राज्यों द्वारा वहन किए जाने के मामले पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एक बड़ा हिस्सा राज्यों को देता है। जिसमें राज्यों का अपना शेयर मिलाकर विकास कार्य करवाने होते है। ऐसे में इस बात को ऐतराज नहीं होना चाहिए।

