गर्मी व हीट वेव से बचाव के लिए आमजन बरतें एहतियातः- एसडीएम संदीप कुमार
हिट वेव के नियमों का पालन करें :-एसएमओ डॉ सुधीर
-पालतू पशुओ का चारा छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी देते रहे -: डॉ सुनील शर्मा
May 22, 2026, 15:45 IST
तोशाम,22 मई।
एसडीएम संदीप कुमार ने उपमंडल के लोगों से आह्वान किया कि वें गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान में हीट वेव के खतरे से बचें। खासकर धूप में काम करने वाले लोगों , खिलाडिय़ों, पढने वाले बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने पर उसके इलाज से बेहतर है, हम सब लू से बचे रहें। यानी हीट वेव से बचाव इलाज से बेहतर है। पक्षीयो के लिए पेड़ पौधों के पास पानी चकोरे नियमित रुप से जरूर भरे।
बॉक्स:-
तोशाम नागरिक अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ सुधीर ने बताया कि हीट वेव से बचाव के लिए स्थानीय मौसम संबंधी खबरों के लिए रेडियो सुनें, टीवी देखें, समाचार पत्र पढ़ें, गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट अथवा छतरी का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। भले ही प्यास न लगी हो, ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड) नींबू पानी, छाछ आदि का भरपूर सेवन कर तरोताजा रहें। बच्चों को वाहनों में अकेले छोडक़र न जाएं उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है, नंगे पांव बाहर न जाने दें, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास जरूर रखें, काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम लें, खेत व खलीहान में काम कर रहे हैं, तो समय-समय पर पेड़ या छाया में आसरा अवश्य लें। गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन कतई ना करें। ताजे फल, सलाद तथा हरी सब्जिया और घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12:00 बजे से सायं 03:00 बजे के बीच धूप में सीधे न जाए। यदि बच्चे को चक्कर आए, उल्टी घबराहट अथवा तेज सिरदर्द हो, सीने में दर्द हो अथवा सांस लेने में कठिनाई हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं और उनके परामर्श से ही उन्हें खाने पीने की वस्तुएं दें।
बढ़ती गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों की खास देखभाल करें, तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों, तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें, ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो, यदि वे गर्मी से बैचेनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें, उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं अथवा उनकी गर्दन तथा बगलों में गीला तौलिया रखें,उनके शरीर को ठंडक देने के साथ साथ डॉक्टर अथवा एम्बुलेंस को बुलाएं, उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें।
बॉक्स :-
पशु पालन एवं डेयरी विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ सुनील शर्मा ने बताया कि पालतू जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी दें, उन्हें घर के भीतर रखें, पीने के पानी के दो बाउल रखें। ताकि एक में पानी खत्म होने पर दूसरे से वे पानी पी सकें, यदि उन्हें घर के भीतर रखा जाना संभव न हो तो उन्हें किसी छायादार स्थान में रखें, जहां वे आराम कर सकें। ध्यान रखें कि जहां उन्हें रखा जाए वहां दिनभर छाया रहे, अपने पालतू पशु औऱ अन्य जानवरों का खाना धूप में न रखें, जानवरों को किसी बंद जगह में न रखें, यदि आपके पास कुत्ता है तो उसे गर्मी में न टहलाएं, उन्हें सुबह और शाम को घुमाएं जब मौसम ठंडा हो, कुत्ते को गर्म सतह पटरी, तारकोल की सडक़, गर्म रेत पर न टहलाएं, किसी भी स्थिति में जानवर को वाहन में न छोड़ें।
एसडीएम संदीप कुमार ने उपमंडल के लोगों से आह्वान किया कि वें गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान में हीट वेव के खतरे से बचें। खासकर धूप में काम करने वाले लोगों , खिलाडिय़ों, पढने वाले बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने पर उसके इलाज से बेहतर है, हम सब लू से बचे रहें। यानी हीट वेव से बचाव इलाज से बेहतर है। पक्षीयो के लिए पेड़ पौधों के पास पानी चकोरे नियमित रुप से जरूर भरे।
बॉक्स:-
तोशाम नागरिक अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ सुधीर ने बताया कि हीट वेव से बचाव के लिए स्थानीय मौसम संबंधी खबरों के लिए रेडियो सुनें, टीवी देखें, समाचार पत्र पढ़ें, गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट अथवा छतरी का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। भले ही प्यास न लगी हो, ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड) नींबू पानी, छाछ आदि का भरपूर सेवन कर तरोताजा रहें। बच्चों को वाहनों में अकेले छोडक़र न जाएं उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है, नंगे पांव बाहर न जाने दें, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास जरूर रखें, काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम लें, खेत व खलीहान में काम कर रहे हैं, तो समय-समय पर पेड़ या छाया में आसरा अवश्य लें। गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन कतई ना करें। ताजे फल, सलाद तथा हरी सब्जिया और घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12:00 बजे से सायं 03:00 बजे के बीच धूप में सीधे न जाए। यदि बच्चे को चक्कर आए, उल्टी घबराहट अथवा तेज सिरदर्द हो, सीने में दर्द हो अथवा सांस लेने में कठिनाई हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं और उनके परामर्श से ही उन्हें खाने पीने की वस्तुएं दें।
बढ़ती गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों की खास देखभाल करें, तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों, तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें, ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो, यदि वे गर्मी से बैचेनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें, उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं अथवा उनकी गर्दन तथा बगलों में गीला तौलिया रखें,उनके शरीर को ठंडक देने के साथ साथ डॉक्टर अथवा एम्बुलेंस को बुलाएं, उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें।
बॉक्स :-
पशु पालन एवं डेयरी विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ सुनील शर्मा ने बताया कि पालतू जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी दें, उन्हें घर के भीतर रखें, पीने के पानी के दो बाउल रखें। ताकि एक में पानी खत्म होने पर दूसरे से वे पानी पी सकें, यदि उन्हें घर के भीतर रखा जाना संभव न हो तो उन्हें किसी छायादार स्थान में रखें, जहां वे आराम कर सकें। ध्यान रखें कि जहां उन्हें रखा जाए वहां दिनभर छाया रहे, अपने पालतू पशु औऱ अन्य जानवरों का खाना धूप में न रखें, जानवरों को किसी बंद जगह में न रखें, यदि आपके पास कुत्ता है तो उसे गर्मी में न टहलाएं, उन्हें सुबह और शाम को घुमाएं जब मौसम ठंडा हो, कुत्ते को गर्म सतह पटरी, तारकोल की सडक़, गर्म रेत पर न टहलाएं, किसी भी स्थिति में जानवर को वाहन में न छोड़ें।

