Uttar Pradesh Law and Order: अतीक और मुख्तार की कब्जे वाली जमीनों पर बने फ्लैट्स, 15 अक्टूबर को पद्मलोक अपार्टमेंट का भूमि पूजन

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार माफियाओं के अवैध कब्जे से मुक्त कराई जमीन पर गरीबों को आवास दे रही है। अतीक-मुख्तार की जमीन पर ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

 
Mukhtar Ansari Dalibagh flats

लोकतंत्र में शासन और सत्ता की असली कसौटी यह है कि वह अपने अधिकारों का उपयोग समाज के सबसे अंतिम और कमजोर व्यक्ति के सशक्तिकरण में कैसे करती है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने माफिया और दबंगों के खिलाफ कार्रवाई का एक नया मानक स्थापित किया है। प्रयागराज के लूकरगंज में माफिया अतीक अहमद की मुक्त कराई गई भूमि पर 76 ईडब्ल्यूएस (EWS) फ्लैट्स और लखनऊ के डालीबाग में मुख्तार अंसारी से जुड़ी जमीन पर 72 फ्लैट्स बनाकर गरीबों को सौंपे जा चुके हैं। इसी कड़ी में अब प्रयागराज के कसारी-मसारी में अतीक के कब्जे से छुड़ाई गई जमीन पर 602 आवासों की विशाल परियोजना 'पद्मलोक अपार्टमेंट' का भूमि पूजन 15 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है।

🚔 संगठित अपराध पर कड़ा प्रहार: 4,309 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्तियां जब्त, 36 माफियाओं को आजीवन कारावास

उत्तर प्रदेश में कानून के राज को पुनः स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने माफिया नेटवर्क के आर्थिक स्रोतों पर सीधा हमला किया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में चिन्हित 68 प्रमुख माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों-सहयोगियों के खिलाफ 909 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 651 की गिरफ्तारी हो चुकी है। 18 पर एनएसए (NSA) और 802 पर गैंगस्टर एक्ट के तहत शिकंजा कसा गया है। ठोस अदालती पैरवी का परिणाम यह है कि अब तक 4,309 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति जब्त की जा चुकी है, जबकि 36 माफियाओं और 104 संगठित अपराधियों को कोर्ट से आजीवन कारावास तथा 2 को मृत्युदंड की सजा दिलाई गई है।

🏠 प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला सामाजिक न्याय का नया अर्थ, आम जनता में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा

सार्वजनिक और बहुमूल्य सरकारी जमीनों को केवल कागजों में मुक्त कराना ही प्रशासनिक सफलता नहीं है, बल्कि उस जमीन का सामाजिक हित में उपयोग करना असली न्याय है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने ये घर न केवल गरीब परिवारों को सिर पर पक्की छत दे रहे हैं, बल्कि उनके भीतर सुरक्षा, स्थायित्व और स्वाभिमान का भाव भी जगा रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में बेशकीमती जमीनों का उपयोग जनहित, गरीबों के आवास, पार्क, स्वास्थ्य केंद्र और विद्यालयों के निर्माण में किया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश में सुशासन और 'जीरो टॉलरेंस' नीति का दृश्य प्रतीक बन चुका है।