चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय में गीता महोत्सव के उलक्ष्य में हुआ गीता सेमीनार का आयोजन

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भिवानी ।

चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय के डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में गीता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठïी में हरियाणा युवा आयोग के चेयरमैन मुकेश गौड़ ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल एवं कुलसचिव रितु सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस संगोष्ठिï में तपोभूमि जटेला आश्रम माजरा के महंत राजेंद्र दास महाराज, जहरगिरि आश्रम के महंत डा. अशोक गिरी महाराज एवं हनुमान जोहड़ी धाम के महंत चरण दास महाराज ने उपस्थित छात्र-छात्राओं व स्टाफ को गीता के उपदेशें की विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि युवा आयोग के चेयरमैन मुकेश गौड़ ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है कि हरियाणा में भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति प्राचीन व महान है हमारे देश में नालन्दा विश्वविद्यालय जिसका अध्यात्म शिक्षा व सनातन शिक्षा में सर्वोच्च स्थान था, जहां पूरे विश्व के युवा शिक्षा ग्रहण करने आते थे। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के प्रयासों से गीता जयंती को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से 21 जून को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। भारत को पुन: विश्व गुरु बनाने की शुरुआत इसी से हुई। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे को बचाना जरूरी है। युवा स्वयं की शक्ति को पहचानें।
संगोष्ठिï में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजकुमार मित्तल ने कहा कि गीता में सर्व कल्याण की बात है। उन्होंने कहा कि गीता में कर्म को प्रधानता है।

उन्होंने कहा कि हम पंचकोश के सिद्धांत को अपनाकर अपने जीवन को आनंदमय बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवा अपनी क्षमताओं को पहचानें। भारत के विश्व गुरु की कल्पना युवाओं के सहारे है। श्री महंत जूना अखाड़ा डा. अशोक गिरी महाराज ने कहा कि केवल गीता ही भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकली हुई है। उन्होंने कहा कि हम उस संस्कृति से संबंध रखते हैं जहां द्वंद में भी गीता का उपदेश चल रहा था। उन्होंने कहा की गीता एक वैश्विक ग्रंथ है। गीता सबके लिए उपयोगी ग्रंथ है।गीता हर किसी को जीवन में कुछ न कुछ देकर जाती है। अर्जुन ने धर्म को स्थापित करने के लिए विषाद किया। गीता हमें जीवन प्रबंधन सिखाती है। उन्होंने गीता में श्री कृष्ण अर्जुन संवाद पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से गीता के अध्ययन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्या विनय देती है विद्या से अहंकार कभी मत बढ़ाओ। अहंकार से पतन होता है। हम सब ने अपने जीवन की दिशा बदल दी है हम सब तत्व ज्ञानी बनें। तपोभूमि जटेला आश्रम माजरा के महंत राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि आज सहनशक्ति और संस्कारों की कमी होती जा रही है जीवन में तनाव ही तनाव बढ़ रहा है और इस तनाव मुक्ति का उपाय श्रीमद्भगवत गीता अध्ययन एवं उसका अनुसरण है। उन्होंने कहा कि हम सबके अंदर कुबुद्धि एवं सद्बुुद्धि दोनों होती हैं कुबुद्धि से विपदा एवं कुविचार आते हैं और सद्बुद्धि से संस्कार और सकारात्मक विचार आते हैं और जीवन आनंदमय बनता है। उन्होंने कहा कि हम सब महापुरुष बन सकते हैं बस स्वयं को पहचानना होगा और समय का सदुपयोग कर अपने अंदर सद्गुण लाने होंगे। हनुमान जोहड़ी धाम के महंत चरण दास महाराज ने कहा कि ग्रंथो का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है।जब व्यवस्था खराब होती है तो संत और ग्रंथ ही हमें सही रास्ता दिखाते हैं।युवाओं को कुसंगत से बचाने में संत और ग्रंथ सहायक हैं। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र हित में काम करने की अपील की। कुलसचिव  ऋतु सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया और सभी परम संतों का जीवन परिचय प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डीन डॉ. सुरेश मलिक, डीन एफसीएम डॉ. सुनीता भरतवाल, डॉ. आशा पूनिया, डॉ. विक्रम सिंह, डॉ. स्नेहलता शर्मा, डॉ. सुशीला आर्या, डॉ. कृतिका, ऋषि शर्मा, डॉ. उमा कुमारी, डॉ. दीपक कुमारी, डॉ. महक, सुनील शर्मा, अभिषेक चंदेल, वसंत शास्त्री सहित अनेक कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

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