भिवानी:108 कुंडीय महायज्ञ में उमड़ा समूचा भिवानी शहर

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भिवानी।
भिवानी के राधा स्वामी आश्रम में चल रहे 108 कुंडीय चंडी महायज्ञ में धर्मप्रेमी व आमजन पूरी आस्था के साथ भाग ले रहे हैं।महायज्ञ के चौथे दिन सुबह आहुति डालने के लिए सीएम हरियाणा के राजनैतिक सचिव व पूर्व मंत्री कृष्ण बेदी,सीएम हरियाणा के भाई चरणजीत खट्टर,जिला परिषद की अध्यक्ष अनिता मलिक,जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नरेश मेहता,पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश शर्मा,पूर्व खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद गाबा,विनोद छाबड़ा सहित अनेकों गणमान्य लोग यज्ञ के साक्षी बने। 108 कुंडीय महा यज्ञ के आयोजक जवाहर मिताथलिया व ओपी नन्दवानी, नन्दराम धानिया,राजकुमार डुडेजा,प्रिंस मिताथलिया, नत्थूराम केड़िया ने बताया कि यह भिवानी का सौभाग्य है कि महा यज्ञ में धर्म प्रचारक जगत गुरू यज्ञ सम्राट मां त्रिपुर सुंदरी पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 हरिओम महाराज का दम्पति यजमानों के साथ सभी को सानिध्य मिल रहा है। आयोजक जवाहर मिताथलिया ने धर्मप्रेमियों व आमजन को बताया कि भिवानी वासियों को धर्म लाभ देने के लिए 108 ब्राह्मणों की टीम पीठाधीश्वर के सानिध्य में आहुति डलवा रही है।प्रमुख समाजसेवी व आयोजक जवाहर मिताथलिया ने कहा कि मिताथलिया परिवार के सहयोग से आयोजित राधा स्वामी सत्संग धाम भिवानी में 108 कुंडीय चंडी महायज्ञ में कोई भी धर्म प्रेमी व आमजन निःशुल्क सुबह हवन यज्ञ में 8 बजे से 11 बजे तक व शाम को 7 बजे महादिव्य आरती में भाग लेकर पूण्य के भागी बन सकता है।
वहीं पीठाधीश्वर श्री हरिओम महाराज जी ने कहा कि जो भी आमजन यज्ञ में किसी कारणवश भाग नही ले सकता वह 108 कुंडीय महायज्ञ की सुबह 5 बजे से लेकर रात 10 बजे तक किसी भी समय चार बार परिक्रमा कर सकता है।परिक्रमा से भी अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है।
यज्ञ सम्राट के मुताबिक नवरात्रों में देवी मां दुर्गा के नौ रूपों का विशेष महत्व है। ये संयोग है कि नवरात्रों में
महायज्ञ जारी है।शक्ति स्वरूप देवी पूजा करने से जीवन में शक्ति का संचार होता है। इसके बाद जब आप शक्ति और ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं और किसी भी कार्य को करते हैं तो सफलता निश्चित मिलती है। इसलिए जरूरी है कि भक्त तन और मन को पवित्र कर मां की पूजा अर्चना करें। हर दिन पूजा से पहले षोडशोपचार करें। दूध, दही, घी, चीनी और शहद (पंचामृत) से देवी-देवताओं को स्नान कराएं। इसके बाद वस्त्र और उपवस्त्र पहनाएं और अक्षत, चंदन, रोली से टीका लगाकर मां को अलंकारिक वस्त्र पहनाएं। इसके बाद सुगंधित द्रव्य, पुष्प, माला चढ़ाने के साथ ही अगरबत्ती, दीपक दिखाएं। इसके बाद दुर्गा सप्तशति में दिए गए मंत्र ‘ओम ऐं हीं क्ली चामुण्डायै विच्चै से पूजा कर सकते हैं।

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