हरियाणा शिक्षा बोर्ड में इतिहास बोध की संगोष्ठी का आयोजन -डॉ. वी.पी.यादव

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भिवानी:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के बैनर तले इतिहास बोध को लेकर आज हरियाणा शिक्षा बोर्ड में एक संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम बोर्ड प्रांगण में स्थित मंदिर में शिव रूद्राभिषेक कर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। इसके बाद कमेटी कक्ष में माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार जी ने शिरकत की तथा विशिष्ठ अतिथि के तौर पर प्रो० आर.के. मित्तल, कुलपति, चौ० बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी, भूपेन्द्र धर्माणी, पूर्व राज्य सूचना आयुक्त, हरियाणा, डॉ० रविप्रकाश, प्रो० इतिहास, चौ० बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी एवं बोर्ड के अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अथितियों को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड अध्यक्ष डॉ० वी.पी.यादव ने की। इस अवसर पर इतिहासकारों व विद्वानों ने अपने-अपने विचार रखे तथा इतिहास विषय को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि इन्द्रेश कुमार जी ने कहा कि एक स्वाधीन और संप्रभु राष्ट्र के नागरिकों को विशेष तौर पर भावी पीढ़ी के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वे अपनी विद्यालयी शिक्षा के दौरान ही इतिहास की घटनाओं को वस्तुपरक ढंग से समझें ताकि उनमें राष्ट्रभक्ति व राष्ट्रप्रेम की भावना उत्पन्न हो। बोर्ड द्वारा तैयार करवाई गई पाठ्यपुस्तकें अध्ययन-अध्यापन के साथ-साथ छात्रों के व्यक्तित्व के चंहुमुखी विकास में प्रभावशाली मार्गदर्शन करेगी। उन्होंने बोर्ड के प्रयासों व उनकी कटिबद्धता की भूरि-भूरि प्रंशसा की।
डॉ० यादव ने कहा कि इतिहास की नई पुस्तकों का लेखन विषय विशेषज्ञों एक इतिहासकारों द्वारा सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पूर्व में इतिहास की पुस्तकों में हमारे मूल इतिहास को उचित स्थान नहीं मिल पाया था। शिक्षा नीति-2020 के निर्देशों की अनुपालना में इतिहास की इन पुस्तकों के माध्यम से करने का सार्थक प्रयत्न किया गया है। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड देश की नीतियों एवं भारतीयता के इतिहास के बोध को लेकर आगे बढ़ रहा है। ये पाठ्यपुस्तकें अध्ययन-अध्यापन के साथ-साथ छात्रों के व्यक्तित्व के चहुंमुखी विकास में प्रभावशाली मार्गदर्शन करेंगी।
प्रो० आर.के. मित्तल ने बताया कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के अनुरूप पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण वनवासी गिरी वासी सभी भूभागों से सम्बन्धित घटनाओं और व्यक्तियों को नई पुस्तकों में यथेष्ठ स्थान देने की कोशिश की गई। पुस्तकों की भाषा, साज-सज्जा, को छात्रों के आयुवर्ग के हिसाब से रूचिपूर्ण और ग्राहय बनाने की कोशिश की गई है।
डॉ० रवि प्रकाश ने कहा कि हरियाणा प्रांत की गौरवशाली परम्परा का इतिहास हमें जानना जरूरी है, यहां की समृद्ध संस्कृति, वेदों व श्रीमदभगवदगीता की रचना इस पावन धरा पर हुई, सेना में यहां के वीर जवान बहुतायत में भर्ती होते है तथा खेलों की दुनिया में तो हरियाणा ने अपना परचम लहराया हुआ है।
उन्होंने बताया कि इन नवीन पुस्तकों में इतिहास का समग्र व व्यापक रूप से उल्लेख किया गया है। पहले की पुस्तकों में सिन्धु घाटी सभ्यता से ही भारतीय इतिहास लिखा जाता रहा है किन्तु सरस्वती नदी का उल्लेख नहीं है। नवीन पुस्तकों में सरस्वती-सिन्धु सभ्यता को विस्तार से वर्णित किया गया है। प्राचीन विश्व की प्रमुख घटनाओं, विश्व के प्रमुख दर्शन के अलावा मध्यकालीन यूरोप व भारत, ईसाइयत एवं ईस्लाम, भारत पर विदेशी आक्रमण, उपनिवेशवाद व साम्राज्यवाद, भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के अलावा स्वतंत्र भारत के 50 वर्षों की भी इतिहास की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
बोर्ड सचिव ने कहा कि शिक्षा बोर्ड द्वारा कक्षा छठी से दसवीं तक के इतिहास की पुस्तकों के पाठ्यक्रम में बड़े स्तर पर बदलाव करते हुए नई पुस्तकें लिखवाई गई। उन्होंने कहा जो देश अपनी संस्कृति व इतिहास को भूल जाता है वह अपना स्वाभिमान खो देता है। इतिहास की नवीन पुस्तकों में भारतीय सभ्यता, इतिहास, संस्कृति, साहित्य, देश-भक्तों, स्वाधीनता संग्राम व उसके ज्ञात-अज्ञात वीरों, सन 1947 के बाद के भारत की प्रमुख घटनाओं को सम्पूर्ण, समग्र व व्यापक रूप में सुन्दर, चित्रों व  बिल्कुल नए कलेवर के साथ प्रस्तुत किया गया है।
इस अवसर पर बोर्ड सचिव कृष्ण कुमार ह.प्र.से. ने बताया कि बोर्ड द्वारा इतिहास विषय के पाठ्यक्रम में परिवर्तन करने के लिए इतिहास के विषय विशेषज्ञों की कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें विद्यालय स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर के इतिहासकार/शिक्षाविद् शामिल रहे, जिसमें डॉ० मुरलीधर शास्त्री, प्रवक्ता संस्कृत का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अन्त में बोर्ड संयुक्त सचिव डॉ० पवन कुमार शर्मा ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन व आभार व्यक्त किया।

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