विज्ञान-तकनीकि के क्षेत्र में भारत के वैज्ञानिकों की दुनिया को बहुत बड़ी देन: मुख्यमंत्री मनोहर लाल

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भिवानी ।

प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में भारत के वैज्ञानिकों की दुनिया को बहुत बड़ी देन है। गणित के क्षेत्र में जीरो, संख्या प्रणाली व पाई का मान दुनियों को हमारे गणितज्ञों ने दिए। ऐसे भारत के 12 वैज्ञानिक हुए हैं, जिनको विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया के सर्वोच्च नॉबेल पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। भारत के सुप्रसिद्घ गणितज्ञ रामानुजन् ने ज्यूमेट्री की 4000 से भी अधिक थ्योर्म की खोज की। उनकी प्रतिभा को देखते हुए कैम्ब्रीज विश्वविद्यालय के प्रो. हार्डी ने उनको अपने साथ रखा, जो हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वïान किया कि वे वायु की तरह तेज गति से चलते हुए आगे बढं़े और विज्ञान के क्षेत्र में नए अविष्कार कर भारत का नाम रोशन करें।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल शनिवार को स्थानीय चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय में राष्टï्र निर्माण में वैज्ञानिकों की भूमिका विषय पर आयोजित दो दिवसीय विज्ञान सम्मेलन के शुभारंभ समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने करीब साढ़े पांच लाख रुपए की लागत से विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित की गई स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने यहां पर 128 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले तीसरे शैक्षिणिक भवन की आधाशिला रखी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यहां पर विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी और श्रीनिवास रामानुजन भवन का अवलोकन भी किया। इस दौरान प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री जेपी दलाल, भिवानी के विधायक घनश्याम सर्राफ, बवानीखेड़ा से विधायक बिशम्बर वाल्मिकी और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके मित्तल भी मौजूद रहे।
विज्ञान सम्मेलन में जिलेभर से आए विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी जीवन में ऊर्जा का संचार करते हैं, जिससे हर क्षेत्र में विकास को गति मिलती है। भारत प्राचीन काल से ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा अतीत वैज्ञानिकों से भरा हुआ है। विज्ञान में भारतीय स्वर्णिम इतिहास के दिग्गजों में सेठ होमी भाबा, जगदीश बसु, रामानुजन, शांतिस्वरुप भटनागर आदि प्रमुख हैं, जिनको विज्ञान के क्षेत्र में अमूल्य योगदान है। आधुनिक युग में भूतपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का नाम भी अग्रणी है।
भारत के 12 वैज्ञानिकों को मिल चुका है कि विज्ञान और तकनीकि के क्षेत्र में नॉबेल पुरस्कार
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत के 12 भारतीयों को उनके वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान के लिए नॉबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। सीवी रमन को उनके रमन प्रभाव के लिए 1930 में तथा बायोकेमिस्ट हर गोबिंद खुराना को प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करने के लिए नॉबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड महामारी के दौरान भारत के वैज्ञानिकों से वैक्सीन डोज बनाने का आह्वïान किया गया था, जिस पर भारत के वैज्ञानिकों ने इस चुनौति को एक अवसर के रूप में स्वीकारा और एक नहीं बल्कि दो वैक्सीन बनाई। 200 करोड़ वैक्सीन डोज बनाकर न केवल भारत में बल्कि अन्य देशों को भी वैक्सीन देने का काम किया। इससे भारत के वैज्ञानिकों ने वर्तमान समय में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
प्रदेश सरकार ने विज्ञान-रत्न पुरस्कार राशि को दो लाख रुपए से बढ़ाकर चार लाख किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत विज्ञान आधारित दृष्टिकोण के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। हरियाणा सरकार नवाचार को लेकर बजट में विशेष प्रावधान कर रही है। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच को और अधिक विकसित करने के लिए विज्ञान-रत्न पुरस्कार राशि को दो लाख रुपए से बढ़ाकर चार लाख रुपए किया गया। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह विज्ञान सम्मेलन भी बहुत ही कारगर साबित होगा।
विज्ञान सम्मेलन को चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. आरके मित्तल ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वन को लागू करने के लिए कदम उठाए हैं। विद्यार्थियों को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने उन्हें जिला रोजगार सृजन केंद्र द्वारा विशेष प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सम्मेलन को कन्वीनर डॉ. सुरेंद्र कौशिक ने भी संबोधित किया। विज्ञान प्रदर्शनी में क्षेत्र के 40 से अधिक सरकारी तथा मान्यता प्राप्त स्कूलों के 500 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।

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